Zakat Sadka Khairat ज़कात सद्का खैरात पर तफ़्सीरी मालूमात क़ुरान हदीस से In Hindi

 Zakat Sadka Khairat ज़कात सद्का खैरात पर तफ़्सीरी मालूमात क़ुरान हदीस से In Hindi

Zakat Sadka Khairat ज़कात सद्का खैरात पर तफ़्सीरी मालूमात क़ुरान हदीस से In Hindi
Zakat Sadka Khairat

(Zakat Sadka Khairat) ज़कात इस्लाम में पांच फर्ज़ो में से एक फ़र्ज़ हैं ज़कात का मन अपने कमाई में से एक हिस्सा गरीब मुस्लिम को देना ये ज़कात कहलाता हैं और इस फ़र्ज़ को हर मोमिन मुस्लमान जो की ज़कात अदा करने का बराबर रूल्स की मुताबित हक़दार हो उसे हर साल में एक बार ज़कात Zakat अदा करना फ़र्ज़ होता हैं 

ज़कात सद्का खैरात (Zakat Sadka Khairat)  पर 62 तफ़्सीरी मालूमात क़ुरान हदीस से 

१ ) मुसलमान (Musalmanरिआया बैतुल माल में जो रकम जमा कराती है उसे ज़कात व उन कहते हैं । यह ज़कात व उश्र मर्दो , औरतों और बच्चों ( बच्चों पर सिर्फ उश्र ) सब पर फर्ज है और ज़िम्मी रिआया जो रकम बैतुल माल में जमा कराती है उसे जिज़िया कहा जाता है । ( ज़ियाउनबी , जिः ४ ) 

२ ) हज़रत इमामे आज़म अबू हनीफा रहमतुल्लाहि अलैहि के नदीक जिज़िये के एतिबार से गैर मुस्लिमों को तीन हिस्सों में तकसीम किया गया है : दौलतमन्द तब्का , औसत आमदनी वाला तब्का और फुकरा । दौलतमन्द तब्के पर अड़तालीस दिरहम सालाना यानी चार दिरहम माहवार , औसत आमदनी वाले तके पर चौबीस . दिरहम सालाना यानी दो दिरहम माहवार और फुकरा पर बारह दिरहम सालाना यानी एक दिरहम माहवार । ( ज़ियाउन्नबी , जिः ४ ) 

३ ) मुसलमानों (Musalman) के पास अगर मवेशी हों जैसे भेड़ , बकरियाँ , गायें , भैसें , घोड़े और ऊँट तो उन की ज़कात Zakat भी मुसलमानों को अदा करनी पड़ती है हालांकि ज़िम्मी रिआया से मवेशियों पर किसी तरह का लगान या टैक्स वुसूल नहीं किया जाता । ( ज़ियाउन्नबी , जिः ४ ) 

४ ) मुसलमान (Musalman) औरत अगर साहिबे निसाब हो या मुसलमान बच्चा अगर साहिबे निसाब हो तो उसे भी लाज़मी तौर पर अपने माल की ज़कात (Zakat Sadka Khairat) और उन देना पड़ता है । इन के बरअक्स किसी ज़िम्मी औरत और बच्चे से कोई जिज़िया नहीं लिया जाता । ( ज़ियाउनबी , जिः ४ )

५ ) नबीये करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः साजो सामान की कसरत से कोई शख्स गनी नहीं होता । गनी वह है जो दिल का गनी हो । ( शैखैन , तिर्मिज़ी ) 

६ ) फ़िरऔन बहुत सख़ी था । उस के मत्बल में रोज़ाना एक हज़ार बकरे कटते थे । जब उस की हलाकत का वक्त करीब आया तो हामान ने उसे खैरात बन्द कर देने की सलाह दी । चुनान्चे उस ने कम करते करते आखिर खैरात बन्द कर दी यहाँ तक कि उस के डूबने के दिन उस की रसोई में सिर्फ एक बकरा जिव्ह हुआ था और वह भी सिर्फ अपने घर के इस्तेमाल के लिये । इतने दिन तक उसे उस की खैरात Khairat ही बचाए रही । ( तफ़सीरे नईमी ) 

७ ) नबीये करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम (Rasool Sallallahu Alaihi Wasallam) ने कोई चीज़ (Hazrat) हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अन्हु के पास तोहफे के तौर पर भेजी । आप ने उसे लौटा दिया । जानते है ? सरकार सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने पूछाः उसे क्यों लौटाया ? (Hazrat) हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अन्हु ने अर्ज़ कियाः या रसूलल्लाह ! क्या यह आप ही का इरशाद नहीं है कि हमारे लिये यही बेहतर है कि हम किसी से भी कोई चीज़ न लें  

सरकार सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमायाः इस का मतलब यह है कि सवाल नहीं होना चाहिये और जो बिना मांगे मयस्सर आए वह तो अल्लाह तआला (Allah Tala) की देन है जिस से उस ने तुम्हें नवाज़ा । हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अन्हु ने कहाः उस ज़ात की कसम जिस के कब्ज़ए कुदरत में मेरी जान है आइन्दा मैं किसी से खुद कोई चीज़ तलब नहीं करूंगा और जो चीज़ बिना मांगे मेरे पास आएगी उसे कुबूल करने में कोई उज़ न होगा । ( मालिक , शैखैन , तिर्मिज़ी ) 

८ ) वफ़ात से एक रोज़ पहले हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उम्मुल मोमिनीन हज़रत आयशा सिद्दीका रज़ियल्लाहु अन्हा से दरियाफ्त फरमायाः ऐ आयशा , वह दीनार कहाँ हैं ? हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा फौरन उठी और आठ दीनार जो रखे हुए थे ले आई और आका की बारगाह में पेश कर दिये । सरकार सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दीनारों को कुछ देर तक उलटते पलट रहे । 

फिर फरमायाः ऐ आयशा , अगर मैं यह दीनार अपने घर में छोड़ कर अपने रब से मुलाकात करूं तो मेरा रब क्या फरमाएगा कि मेरे बन्दे को मुझ पर भरोसा नहीं था । आयशा , इन को फौरन मिस्कीनों में बाँट दो । चुनान्वे आप ने अल्लाह के हबीब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के घर में जो आख़िरी पूंजी थी उसे निकाल कर मोहताजों में तकसीम कर दिया ( ज़ियाउत्रबी , जिः ४ ) 

९  ) वह ज़ाते अकदस जिसे अल्लाह तआला (Allah Tala) ने ज़मीन के सारे ख़ज़ानों की कुंजियाँ अता फरमाई थी उस के घर की कैफियत यह थी कि ज़िन्दगी की आख़िरी रात में चराग़ में तेल नहीं था । हज़रत सिद्दीका रज़ियल्लाहु अन्हा बयान करती हैं : मैं ने अपना चराग़ अपनी एक पड़ोसन की तरफ़ भेजा और कहलवाया कि अपनी तेल की कुप्पी से चन्द कतरे इस चराग़ में डाल दो ताकि आज की रात गुज़र जाए । ( तारीखे अलखमीस , जिः २ ) 

१० ) हज़रत अबू सईद रज़ियल्लाहु अन्हु कहते हैं : सरकार सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि इन्सान का अपनी ज़िन्दगी के अय्याम में एक दिरहम सदका करना मरने के वक़्त सौ दिरहम सदका करने से बेहतर है । ( तर्मिज़ी ) 

११ ) हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु कहते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमायाः सख़ी अल्लाह तआला से करीब है , जन्नत के करीब है , लोगों के करीब है और दोज़ख़ से दूर है । और बख़ील अल्लाह तआला से दर है , जन्नत से दूर है , लोगों से दूर है और जहन्नम से करीब है और जाहिल सखी खुदा के नज़दीक इबादत गुज़ार बखील से कहीं बेहतर है । ( तिर्मिजी ) 

१२ ) एक हदीस में आया है कि कोई वली ऐसा नहीं हुआ कि जिस में अल्लाह अज्ज व जल्ल ने दो आदरों पैदा न कर दी होंः एक सख़ावत दूसरी खुश खल्की । ( कन्जुल अम्माल ) 

Zakat Sadka Khairat ज़कात सद्का खैरात पर तफ़्सीरी मालूमात क़ुरान हदीस से In Hindi
Zakat Sadka Khairat

१३ ) उम्मुल मोमिनीन हज़रत आयशा सिद्दीका रज़ियल्लाहु अन्हा से मरवी है कि एक शख़्स रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास आया और बोलाः या रसूलल्लाह ! मेरी माँ का अचानक इन्तिकाल हो गया । मेरा ख्याल है कि अगर वह कुछ बोल सकतीं तो ज़रूर मुझे सदका खैरात Khairat करने का हुक्म देतीं । 

आप फरमाएं अब अगर मैं उन की तरफ़ से कुछ सदका खैरात करूं तो क्या इस का सवाब उनको मिलेगा ? रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः उसे इस का सवाब ज़रूर मिलेगा । ( बुख़ारी शरीफ़ , मुस्लिम ) 

१४ ) हज़रत उकबा बिन आमिर रज़ियल्लाहु अन्हु कहते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमायाः तुम्हारे मरहूमीन सदका और खैरात (Zakat Sadka Khairat) के सबब कब्र की तपिश से मेहफूज़ रहते हैं । ( तबरानी ) 

१५ ) हज़रत अनस रज़ियल्लाहु अन्हु कहते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमायाः जब कोई शख़्स अपने किसी नेक काम का सवाब किसी गुज़रे हुए शख्स को पेश करता है तो उस सवाब . को हज़रत जिब्रईल अलैहिस्सलाम एक नूरानी रकाबी में रख कर उस शख्स की कब्र पर ले जाते हैं और उसे ख़बर करते हैं कि तुम्हारे फुलाँ फुलाँ रिश्तेदार ने यह तोहफा तुम्हें भेजा है इसे कुबूल करो । यह सुन कर वह मुर्दा बहुत खुश होता है और उस के पड़ोसी जो ऐसे तोहफे से मेहरूम रहे बहुत गमगीन होते हैं । ( तबरानी ) 

१६ ) हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का इरशाद है : बहुत जल्द लेग ऐसा वक़्त देख लेंगे कि इन्सान अपनी ज़कात (Zakat Sadka Khairat) का सोना लेकर मुस्तहिक तलाश करता फिरेगा और कोई लेने वाला न मिलेगा । ( बुख़ारी व मुस्लिम ) 

१७ ) (Hazrat) हज़रत सुफ़ियान सूरी रहमतुल्लाहि अलैहि फरमाते हैं कि जो शख्स हराम माल से सदक़ा देता है वह उस शख़्स जैसा है जो नापाक कपड़े को पेशाब से धोता है जिस से और भी नापाक हो जाता है । ( कीमियाए सआदत ) 

१८ ) रसूले अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमायाः सदका अदा करना हर मुसलमान (Musalman) पर ज़रूरी है । सहाबा ने पूछाः अगर वह इस काबिल न हो ? फरमायाः अपने हाथों से कोई काम करे और उस कमाई से अपने आप को नफा पहुंचाए और कुछ सदका करे । 

अर्ज़ कियाः अगरं इस का मक़दूर न हो ? फरमायाः किसी हाजतमन्द की मदद करे । पूछाः अगर इस की भी ( क्या आप जानते हैं । इस्तिताअत न रखता हो ? फरमायाः अग्र बिल मअरुफ करे । सवाल कियाः अगर यह भी न कर सके ? फरमायाः अपने आप को शर पहुंचाने से बाज़ रखे , यही उस का सदका है । ( शैलेन ) 

१९ ) हकीम बिन हिज़ाम रज़ियल्लाहु अन्हु ने अर्ज़ कियाः मैं जाहिलियत के दिनों में कई एक नेक काम करता था जैसे कि नमाज़ , गुलामों की रिहाई और सदका वगैरा । अब इस्लाम Islam लाने के बाद क्या मुझे उन नेकियों का सवाब मिलेगा । रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमायाः जो नेकियाँ तुम कर चुके हो उन्ही की बरकत से तुम मुसलमान हुए हो ( शैखैन ) 

२० ) रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमायाः मिस्कीन को सदक़ा देना तो एक सदके का सवाब है लेकिन किसी जी रहम ( रिश्तेदार ) को देना दोहरा सवाब है , एक तो सदके का दूसरा सिलए रहमी का । ( निसाई ) 

२१ ) कलामे पाक में १५० जगह खैरात Khairat की ताकीद आई है । ( तफ़सीरे नईमी ) 

२२ ) हज़रत अदी बिन हातिम रज़ियल्लाहु अन्हु अपने कबीलए तय का सदका लेकर हाज़िर हुए तो चूंकि इस्लाम Islam  में यह पहला सदका था इस लिये इसे देख कर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और सहाबा के चेहरे खुशी से चमक उठे । ( नुज्हतुल कारी ) 

२३ ) रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमायाः सदक़ए फित्र देने वाले को हर दाने के बदले में सत्तर हज़ार महल मिलेंगे जिन की लम्बाई मश्रिक से मगरिब तक होगी । ( तोहफतुल वाइज़ीन ) 

२४ ) (Hazrat) हज़रत इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा कहते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमायाः सदकए फित्र इस लिये वाजिब किया गया है कि जो कुछ रोजे की हालत में लग्व और बेहूदगी की जाती है उस के बदले मसाकीन को खाना खिलाना चाहिये । ( तफसीरे नईमी ) 

२५ ) हज़रत अब्दुल मुत्तलिब इब्ने रबीआ रज़ियल्लाहु अन्हु कहते हैं कि रसूले अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमायाः सदके के अमवाल लोगों के मैल होते हैं यह मुहम्मद और आले मुहम्मद के लिये जाइज़ नहीं हैं । ( तफ़सीरे नईमी ) 

२६ ) हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु कहते हैं कि नबीये करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सामने जब कभी खाना लाया जाता तो हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पूछ लेते कि यह सदका है या तोहफ़ा । अगर कोई कह देता कि यह सदका है तो सहाबा से फरमाते तुम लोग खाओ । और अगर वह कह देता कि पेशकश है तो अपना दस्ते मुबारक बढ़ा कर नोश फरमाना शुरू कर देते । ( नुन्हतुल कारी ) 

२७ ) हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु कहते हैं कि नबीये करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम (Rasool Sallallahu Alaihi Wasallam) हदिया कुबूल फरमाते थे और इस का इवज़ भी पूरा अता फरमाया करते थे । ( तफसीरे नईमी ) 

२८ ) (Hazrat) हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने उमर रज़ियल्लाहु अन्हु कहते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः न गनी के वास्ते सदका लेना जाइज़ है और न तन्दुरुस्त के वास्ते जो मेहनत कर सकता हो । ( तफसीरे नईमी ) 

२९ ) रसूले खुदा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का फरमान है : तालिबे इल्म पर एक दिरहम ख़र्च करने वाले को इतना सवाब मिलता है गोया उस ने कोहे उहद के बराबर सोना खैरात Khairat किया । ( तोहफतुल वाइज़ीन ) 

३० ) रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम (Rasool Sallallahu Alaihi Wasallam) फरमाते हैं : सदका सत्तर बलाओं को टालता है इन में सब से कम दर्जे की बला जुज़ाम और बर्स है । ( जामए सगीर ) 

३१ ) नबीये करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमायाः जब आदमी मर जाता है तो उस के सारे आमाल मुन्कतअ हो जाते हैं मगर तीन चीजें बाक़ी पहली सदकए जारिया , दूसरी नेक औलाद जो वालिदैन के लिये दुआ (Dua) करती रहे और तीसरी इल्म जो उस के बाद लोगों को फायदा पहुंचाए । ( तम्बीहुल गाफिलीन ) 

३२ ) सरवरे आलम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः जो शख्स किसी नंगे को कपड़ा देगा अल्लाह तआला उसे जन्नत के सब्ज़ लिबास अता करेगा । जो किसी भूखे को खाना खिलाएगा उसे जन्नत के मेवे दिये जाएंगे । जो किसी प्यासे को पानी पिलाएगा उसे जन्नत की खुशबू और शराब से सैराब किया जाएगा । ( तोहफतुल वाइज़ीन ) 

३३ ) रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का इरशाद है कि अपनी ज़िन्दगी में एक दिरहम खैरात (Zakat Sadka Khairat) करना मौत के वक्त सौ दिरहम देने से अफ़ज़ल है । ( तोहफ़तुल वाइज़ीन ) 

३४ ) रसूले अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमायाः जिस किसी ने किसी मुसलमान (Musalman) को पेट भर खाना खिलाया , अल्लाह तआला उसे दोज़ख़ से दूर रखेगा और उस के और जहन्नम के बीच ऐसी ख़न्दकें बना देगा कि हर ख़न्दक के बीच पांच सौ बरस की राह का फासला होगा । ( तोहफतुल वाइज़ीन ) 

३५ ) (Hazrat) हज़रत आयशा सिद्दीका रज़ियल्लाहु अन्हा रिवायत करती हैं कि रसवरे आलम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमायाः सखावत के दरख़्त की जड़ जन्नत में और इस की टहनियाँ दुनिया में झुकी हुई हैं जो इस की एक टहनी को पकड़ लेगा वह टहनियों टहनियों जन्नत में पहुंच जाएगा और कंजूसी के क्या आप जानत दरख्त की जड़ बीच दोज़ख़ में और इस की शाखें दुनिया में फैली हुई हैं एक ही टहनी सीधी दोज़ख़ में पहुंचा देगी । ( तोहफतुल वाइज़ीन ) 

३६ ) हदीस में है कि ऊपर का ( देने वाला ) हाथ नीचे के ( लेने वाले ) हाथ से बेहतर होता है । ( बुख़ारी शरीफ ) 

३७ ) हदीस में इरशाद है कि गरीबों और बेवाओं की ख़िदमत करने वाला वही दर्जा रखता है जो अल्लाह तआला (Allah Tala)  की राह में जिहाद करने वाले का या रात भर नमाज़ पढ़ने और दिन भर रोज़ा रखने वाले का होता है । ( तोहफतुल वाइज़ीन ) 

३८ ) रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमायाः जिसे अल्लाह तआला ने माल अता किया और उस ने माल की ज़कात (Zakat Sadka Khairat) न दी तो कियामत के दिन अल्लाह तआला उस माल को एक ख़ौफ़नाक सांप की शक्ल में जाहिर करेगा जिस के सर पर बाल खड़े होंगे और जिस की आँखों के ऊपर दो सियाह नुक्ते होंगे । यह सांप उस के गले का हार बनाया जाएगा और सांप उस के दोनों जबड़ों को पकड़ कर रखेगा फिर कहेगा कि मैं हूँ तेरा माल , मैं हूँ तेरा ख़ज़ाना । ( मिश्कात शरीफ ) 

३९ ) रसूले अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम फ़रमायाः जिस मुसलमान (Musalman) ने कोई दरख्त लगाया और उस का फल आदमियों और जानवरों ने खाया तो उस लगाने वाले के लिये बड़ा सवाब और सदका है । ( तोहफतुल वाइज़ीन ) 

४० ) नबीये करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का इरशाद है : जिब्रईल अलैहिस्सलाम मुझे पड़ोसी पर एहसान की यहाँ तक वसियत करते रहे कि मुझे ख्याल हुआ कि पड़ोसी को मेरा वारिस ही करके छोड़ेंगे । ( बुख़ारी शरीफ ) 

Zakat Sadka Khairat ज़कात सद्का खैरात पर तफ़्सीरी मालूमात क़ुरान हदीस से In Hindi
Zakat Sadka Khairat

४१ ) हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का इरशाद है : अगर किसी ज़मीन हो तो उसे चाहिये कि उस की काश्त करे वरना अपने किसी भाई को दे दे । ( तफसीरे नईमी ) .

४२ ) हदीस में है कि बेवा औरत और मिस्कीन के साथ सुलूक करने वाला ऐसा है जैसे अल्लाह की राह में जिहाद करने वाला या तमाम रात नवाफिल पढ़ने वाला और दिन को रोज़ा रखने वाला । ( तफसीरे नईमी ) 

४३ ) (Hazrat) हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि साजो सामान की बोहतात से कोई गनी नहीं होता । गनी वह है जो दिल का ग़नी हो यानी अल्लाह की राह में खर्च कर सकता हो । ( तफसीरे नईमी ) 

४४ ) नबीये करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम (Rasool Sallallahu Alaihi Wasallam) ने फरमायाः तुम में का कोई शख्स अपने से अमीर की तरफ देखे तो चाहिये कि फिर अपने से गरीब की तरफ भी ख्याल करे । ( तफसीरे नईमी ) 

४५ ) रसूले मुअज्जम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमायाः तुम उस से रहम के साथ पेश आओ जो तुम से कटे , उसे दो जो तुम्हें मेहरूम रखे और उसे माफ कर दो जो तुम पर जुल्म करे । ( सब्ए सनाबिल शरीफ ) 

४६ ) रसूले मुअज्जम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमायाः तुम में सब से अच्छा शख़्स वही है जो सब से अच्छे अख़लाक वाला हो । ( बुख़ारी शरीफ ) ४७ ) दिरहम और दीनार यानी मालो ज़र में गिरफ्तार जिस क़दर इन्सान हैं जिन के दिलों पर दुनियवी माल की हविस कब्जा कर चुकी है , उन के लिये अल्लाह तआला की लअनत और फिटकार है । ( तोहफतुल वाइज़ीन ) 

४८ ) मालो ज़र रखने वाला गनी नहीं होता बल्कि गनी वह है जो दिल का गनी हो यानी तवन्गरी दिल से होती है न कि मालो ज़र से । ( तोहफ़तुल वाइज़ीन ) 

४९ ) हदीस में है कि ग़नी की सही तारीफ़ यह है कि दूसरों के पास जो कुछ है उस से फायदा उठाने की ख्वाहिश दिल में न रखे यानी गैरों के माल से बेनियाज़ होना ही हकीकृत में ग़नी होना है । ( तोहफतुल वाइज़ीन ) 

५० ) हदीस में है कि यकीनी नफा देने वाली तिजारत सखावत है यानी अल्लाह की राह में देना अकारत नहीं जाता , इस में नफा ही नफा है । ( तोहफतुल वाइज़ीन ) 

५१ ) सखावत के लिये सब से ज़्यादा नुक्सान देने वाली चीज़ है सखावत करने के बाद एहसान जताना । उलमा ने कहा है एहसान जताना सखावत का सूद है जो हराम है । ( तोहफतुल वाइज़ीन ) 

५२ ) हदीस में है कि पाकीज़ा बात और नर्मी का जवाब साइल का सदक़ा है । अगर जेब ख़ाली हो तो मीठी बात खैरात (Zakat Sadka Khairat) का नेअमुल बदल होती है । ( तोहफतुल वाइज़ीन ) 

५३ ) मोमिन के लिये इस में इस्लामी Islam  खू का शाइबा भी न होगा कि वह पेट भर खाए और उस का पड़ोसी भूखा हो गोया हमसाए की ख़बरगीरी मोमिन पर वाजिब और लाज़िम है । ( तोहफतुल वाइज़ीन ) 

५४ ) हदीस में है कि जो शख्स अता करने और मना करने और मुहब्बत करने में सिर्फ अल्लाह तआला की रज़ामन्दी चाहता हो यही ईमान में कामिल होता है । यानी उस की अता और मना और मुहब्बत और कीना में किसी गैरे खुदा का दखल और नफ़्स की खुशनूदी मुराद न हो । ( तोहफ़तुल वाइज़ीन ) 

५५ ) हदीस में है कि जो शख़्स बेकसों पर रहम नहीं करता उस पर अल्लाह तआला भी रहम और रहमत नहीं फरमाता यानी रब्बे करीम के रहम को करीब लाने वाली चीज़ उरा की नादार मखलूक पर रहम करना है । ( तोहफतुल वाइज़ीन ) 

५६ ) नबीये करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमेशा गरीबों और मिरकीनों से इस तरह पेश आते थे कि वह लोग अपनी गरीबी को रहमत समझने लगते और अमीरों को हसरत होती थी कि हम गरीब क्यों न हुए । ( नुन्हतुल कारी ) 

Zakat Sadka Khairat ज़कात सद्का खैरात पर तफ़्सीरी मालूमात क़ुरान हदीस से In Hindi
Zakat Sadka Khairat

५७ ) रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम (Rasool Sallallahu Alaihi Wasallam) की दुआ (Dua) हुआ करती थीः ऐ मेरे रब मुझे मिस्कीन ज़िन्दा रख , मिस्कीन उठा और मिस्कीनों के साथ ही मेरा हश्र कर । ( नुव्हतुल कारी ) 

५८ ) हुजूरे अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमायाः मैं ने जत्रत के दरवाजे पर खड़े हो कर देखा कि उस में ज्यादा गरीब और मिस्कीन थे और मालदार दरवाज़े पर रोक दिये गए थे । ( तोहफतुल वाइज़ीन ) 

५९ ) एक बार रसूले अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने शहादत की उंगली और बीच की उंगली को मिला कर फरमायाः मैं और यतीम की परवरिश करने वाला जन्नत में इन दो उंगलियों की तरह करीब होंगे । ( बुख़ारी शरीफ़ ) 

६० ) हुजूरे अनवर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमायाः तुम को रोज़ी और मदद तुम्हारे बूढ़ों और कमज़ोरों की बदौलत दी जाती है । गोया बूढ़ों की ख़िदमत अल्लाह तआला के रहम का वसीला है । ( तोहफतुल वाइज़ीन ) 

६१ ) नबीये करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमायाः जो शख़्स पांच चीजें रोकेगा , अल्लाह तआला उस से पांच चीजें रोक लेगा । एक , जो ज़कात (Zakat Sadka Khairat) रोकेगा , अल्लाह तआला आफ़तों से उस के माल की हिफाज़त को रोक लेगा । दो , जो ज़मीन की पैदावार का दसवाँ हिस्सा रोक लेगा , अल्लाह तआला उस की तमाम कमाई की बरकत रोक लेगा । तीन , जो सदका रोकेगा , अल्लाह उस की आफियत को रोक लेगा । चार , जो सिर्फ अपने नफ़्स के लिये दुआ (Dua)करेगा , अल्लाह तआला उस से कुबूलियत को रोक लेगा । पांच , जो नमाज़ के लिये जमाअत में हाज़िर होने से रुकेगा , अल्लाह तआला (Allah Tala)  उस से ईमान के कमाल को रोक लेगा । यानी उस का ईमान कामिल न होगा । ( जुन्दतुल वाइज़ीन ) 

६२ ) (Hazrat) हज़रत अनस रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम (Rasool Sallallahu Alaihi Wasallam) फरमाते हैं : सदका सत्तर बलाओं को दफा कर देता है , उन में सब से हल्की बला कोढ़ की बीमारी है । ( बुख़ारी शरीफ ) 


अल्हम्दो लिल्ला कितना प्यारा मजहब मजहबे इस्लाम हैं जो दुसरो को पहले याद करो और अपने कमाई में से उन गरीब के लिए ज़कात सदका खैरात  (Zakat Sadka Khairat) निकलने के लिए कहता हैं इसे  ज्यादा से ज्यादा शेयर करे इसले सवाब के नियत से


Zakat Sadka Khairat ज़कात सद्का खैरात पर तफ़्सीरी मालूमात क़ुरान हदीस से In Hindi  Zakat Sadka Khairat ज़कात सद्का खैरात पर तफ़्सीरी मालूमात क़ुरान हदीस से In Hindi Reviewed by IRFAN SHEIKH on February 09, 2021 Rating: 5

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